कब से अरमान ज़िन्दगी के जगा रहा हूँ,
कब से उसे मैं बिन रुके बुला रहा हूँ,
कब से इंतज़ार है उसके आने का,
कब से विचार है उसमें डूब जाने का,
कब से आरज़ू है उसकी आवाज़ में खो जाने की,
कब से चाहत है उसकी चाहत को अपना बनाने की,
कब तक यह रहेगा एक सपना,
कब होगा यह सच, या कभी नहीं?
अग4
बहुत ही प्यारा लिखा है आप ने!!
@Tosha Thank you!
Really impressive!!!
@Priti Thank you!!